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नारनौल में मेडिकल कॉलेज के नाम पर सियासी पारा चढ़ा

नारनौल में मेडिकल कॉलेज के नाम पर सियासी पारा चढ़ा, सत्ता और विपक्ष आमने-सामने

हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के मुख्यालय नारनौल में प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज को लेकर प्रदेश की राजनीति में घमासान छिड़ गया है। कॉलेज को लेकर उठे विवाद ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ही इस मुद्दे पर आमने-सामने आ गए हैं। जहां सत्ताधारी भाजपा-जजपा गठबंधन इसे सरकार की बड़ी उपलब्धि बता रहा है, वहीं विपक्ष आरोप लगा रहा है कि यह सिर्फ “कागजी योजना” है और इसका ज़मीन पर कोई ठोस काम नहीं हुआ है।

🏥 क्या है विवाद की जड़?

दरअसल, नारनौल में एक आधुनिक मेडिकल कॉलेज बनाने की घोषणा सरकार ने दो साल पहले की थी। इसके लिए बजट में धन आवंटित भी किया गया था और ज़मीन की पहचान भी की गई थी। लेकिन अब तक वहां निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है।

हाल ही में जब स्थानीय प्रशासन ने कॉलेज की जमीन को लेकर फिर से सर्वे किया, तो राजनीतिक हलचल तेज हो गई। कुछ नेताओं का दावा है कि कॉलेज को नारनौल की बजाय किसी दूसरे क्षेत्र में शिफ्ट करने की तैयारी चल रही है, जिससे नाराजगी और भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है।

🧑‍⚖️ विपक्ष के आरोप

विपक्ष के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने आरोप लगाया है कि:

“प्रदेश सरकार सिर्फ कागजों पर योजनाएं बनाकर जनता को गुमराह कर रही है। नारनौल में मेडिकल कॉलेज की घोषणा के बाद भी आज तक एक ईंट नहीं लगी है। यह युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ है।”

कांग्रेस के साथ-साथ इनेलो और आम आदमी पार्टी के स्थानीय नेताओं ने भी सरकार पर निशाना साधा है। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक चुनावी स्टंट था, ताकि दक्षिण हरियाणा के लोगों को बहलाया जा सके।

🏛️ सत्तापक्ष की सफाई

इस पर सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने पलटवार किया है। स्थानीय भाजपा विधायक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा:

“कॉलेज की जमीन को लेकर कुछ तकनीकी दिक्कतें थीं, जिन्हें दूर कर लिया गया है। जल्द ही निर्माण कार्य शुरू होगा। विपक्ष मुद्दा विहीन हो चुका है, इसलिए बेबुनियाद आरोप लगा रहा है।”

राज्य सरकार के स्वास्थ्य मंत्री ने भी साफ किया कि मेडिकल कॉलेज की परियोजना रद्द नहीं की गई है, बल्कि इसकी प्रक्रिया धीमी जरूर है पर चल रही है।

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🗣️ स्थानीय लोगों की प्रतिक्रियाएं

नारनौल और आसपास के गांवों के लोग इस मुद्दे को लेकर खासे उत्साहित थे, लेकिन अब उनकी उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। एक स्थानीय निवासी रामबीर यादव ने बताया:

“सरकार ने घोषणा की थी तो हमें लगा कि हमारे बच्चों को यहीं अच्छी मेडिकल पढ़ाई मिल सकेगी। लेकिन अब लगता है सब सिर्फ राजनीति थी।”

छात्र संगठनों ने भी इस पर कड़ी नाराजगी जताई है और चेतावनी दी है कि अगर मेडिकल कॉलेज का काम जल्द शुरू नहीं हुआ, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।

🔎 वर्तमान स्थिति क्या है?

  • जमीन चिन्हित की जा चुकी है लेकिन निर्माण शुरू नहीं हुआ।
  • टेंडर प्रक्रिया की जानकारी अस्पष्ट है।
  • प्रशासन द्वारा दोबारा सर्वे किए जाने से संदेह बढ़ा।
  • राजनीतिक बयानबाज़ी तेज, लेकिन ज़मीनी हकीकत जस की तस।

🚨 क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

शिक्षा और स्वास्थ्य मामलों के जानकारों का मानना है कि मेडिकल कॉलेज का निर्माण किसी भी क्षेत्र के लिए विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होता है। इससे न केवल स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर होती हैं, बल्कि रोजगार और शिक्षा के अवसर भी पैदा होते हैं। ऐसे में इस प्रोजेक्ट का रुक जाना या टलना चिंता का विषय है।

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